सही कौन : रानी पद्मावती का चिंतामण तोता या भ्रमित भंसाली
बॉलीवुड में पीरियड फिल्मो का दौर फिर से शुरू हो चूका है और इस दौर को लाने का श्रेय जाता है संजय लीला ऐ भंसाली को, जो भव्य क्लासिकल फिल्म बनाने में महारत हासिल कर चुके है, पर लगता है एक के बाद एक भव्य फिल्म बनाने के चक्कर में लीलाजी खुद घनचक्कर हो गए है. उनको ऐसा भ्रम है कि “Boss is always right” की तर्ज़ पर वह always right है और सारा ज़माना बेवकूफ. एक बार बाजीराव मस्तानी बनाकर वो अपने को K. Asif के समकक्ष सिद्ध करने का प्रयास कर चुके है, उनका यह प्रयास काबिल-ऐ-तारीफ़ था पर दीपिका कहीं भी मधुबाला के आसन-पासन में नहीं लगती.... मोरे पनघट पर नन्दलाल छेड़ गयो(मुग़ल-ऐ-आज़म)... की तर्ज़ पर मोहे रंग दो लाल(बाजीराव मस्तानी).... दीपिका पर फिल्माया गाना देखकर हंसी छुट जाती है. दीपिका अपनी हाईट के कारण बेम्बू जैसी फीलिंग देती है. मधुबाला और दीपिका की आपस में तुलना जैसे सूरज को दिया बताने के बराबर है. अब फिर से भंसालीजी ने अपनी डेढ़ बुद्धि का परिचय देते हुए दीपिका को रानी पद्मावती के लिए कास्ट करने जा रहे है. काश! कोई जाकर लीलाजी का नोलेज बिल्ड उप करे की रानी पद्मावती “ Legend Royal Beauty ” ...