उन्हें मोहब्बत क्या हुई,वो इठला कर चलने लगे
उन्हें मोहब्बत क्या हुई वो इठला कर चलने लगे खुद को सजाने संवारने में आइनों पे आईने बदलने लगे अब आसमां में चाँद भी देखो सोच समझ कर निकलने लगे उन्हें मोहब्बत क्या हुई वो इठला कर चलने लगे | फक्र नहीं ये फ़िक्र की बात है कि अब दीवाने-परवाने उन पर बेइनतहां बेख़ौफ़ मचलने लगे ...