Posts

Showing posts with the label hindi poem

Believe Me Love Never Wants

Image
Believe me...Love never wants...! Do you ever fall in love once ? Off course, i do yes from your side, Believe me...Love never wants...! Hurting anyone, destroying anything, Flirting with beloved, deleting everything, Believe me...Love never wants...! Painful custody, doubtful vigilance, Fraud with best buddy, banning self sense, Believe me...Love never wants...! committing suicide, attempting murder, Blaming inside, scolding outside, Believe me...Love never wants...! Breaking any heart, creating uncomfortable Spreading dirt, showing off pervert level !!! Trust me...Love only wants...! Lovely touches,kisses & closely hugs with emotions, To worship lovers all wishes and choices, Trust me...Love only wants...! Every moment with sharp attention, Ever sweetest indefinite dimension, Trust me...Love only wants...! Growing naturally and remembering publicly, Living joyfully and dying peacefully...!!! "Amazing Love Chemistry Between 2 Hearts" Click Here-      ...

दास्ताने-दिनकर : युगों-युगों से सिने में आग लिए

Image
ClicK Me FoR WoW VideO... युगों - युगों से सिने में आग लिए , मैं पल - पल जलता - पिघलता हूँ , किसे सुनाऊं " दास्ताने - दिनकर ", कैसे सांझ - सवेरे ढलता निकलता हूँ | चन्दा - चकोरी की , प्रेम कहानी जग जाने , टूटते तारों पे मन्नतें , मांगते है ये जमाने , कोई ज़र्रा नहीं जो , मेरे गमो से रूबरू हो जाए , इस महफ़िल में तो , सब चाँद - तारों के है दीवाने | क्या खूब जिंदगी तूने , मुझे अता की है मेरे मौला , शबनम का नामो - निशाँ नहीं , तूने मेरे एहसासों में घोला , बना दिया तूने मेरी , सूरत - सीरत को आग का गोला , बस दहकता रहता है , मेरे रोम - रोम में शोला ही शोला | मोती ममता के क्या होते है , पलकों पर सपने कैसे सोते है , भूख - प्यास क्या होती है , आँखे भर - भर आंसू कैसे रोती है , इनको महसूस नहीं कर पाता हूँ , पत्थर से भी नीरस जिंदगी बिताता हूँ , किसे सुनाऊं " दास्ताने - दिनकर ",   कैसे सांझ - सवेरे ढलता निकलता हूँ | ClicK Me FoR WoW VideO...

परछाई,महबूबा यूँही नहीं तुम पर मरेगी

Image
एक दिन परछाइयां जरुर बोलेगी, अनल बर्फ के आंसू जरुर घोलेगी, समीर को न गिला न शिकवा होगा, ना बदरिया का कोई सिलसिला होगा |   जब ये कायनात डग - मग डोलेगी , फुर से चिड़िया दाना चुगकर, खुले आसमां में छम - छम तेरेगी , तुम ताकते रहना नदी किनारे, मछली सारे रजिया के राज खोलेगी | कलियों की कहानी पुरानी हो गई, अब गलियों में जवानी दीवानी हो गई, शबनम से अब हाला नहीं भरेगी, शराबियों से अब शराब नहीं डरेगी | तुम आइना क्यों देखते हो- महबूबा युहीं नहीं तुम पर मरेगी, थोड़ी घड़ियाँ थामकर चलो यारों, इनकी कदम - कदम पर जरुरत पड़ेगी | एक दिन परछाइयां जरुर बोलेगी, अनल बर्फ के आंसू जरुर घोलेगी 

दर्द का बाज़ार है,ज़ख्मो का व्यापार है

Image
दर्द का बाज़ार है ,ज़ख्मो का व्यापार है बहते खून पसीने का मोल क्या यहाँ ? शराबों में डूबा हुआ गुले गुलजार है | रखैलों ने इज्जत का जिम्मा उठाया है देखो भरी महफिलों में तन-बदन लुटाया है देखो| धर्मो की धज्जियां उड़ा रहे है पाखंडी और रंडी के मजे ले रहे है शाणे शिखंडी गरीबों को ना मिरिंडा मिल रहा है ना हंडी और बड़े भाव खा रही है भारतीय मण्डी लावारिस,लावारिस ही भटक रहा है देश का संविधान जाने कहाँ लटक रहा है खुलेआम आतंकवाद की हो रही अय्याशी है और भ्रस्टाचारी हाथों-हाथ हेरा फेरी गटक रहा है | बस्ती-बस्ती,हस्ती-हस्ती यही नोटंकी यही नाटक है ना खिड़की ना दरवाजा और ना कोई फाटक है अपराधियों की चौपालों पे चल रही बैठक है | घर का भेदी लंका ढहा रहा है ना सोने का हार ना फांसी का फंदा समझ आ रहा है छाछ मक्खन पडोसी का कुत्ता खा रहा है घर का उल्लू बाहर ताक झाँक रहा है | विषयों में वीकट घिरा हुआ है युवा महिलाओं पे दिन दहाड़े हो रहा धावा जानते हुए भी अनजान बनते है वो जो चाट चाटकर खा रहे है मलाई मावा !