क्या आप जानते है अमित-राजीव की दोस्ती की यह सच्चाई?


दोस्त शब्द जैसी ही हम जुबाँ पर लाते है “ये दोस्ती हम तोड़ेंगे...या बने चाहे दुश्मन ये सारा ज़माना,सलामत रहे दोस्ताना हमारा” ये गाने लबों पर आते है. दोस्ती खुदा की दी हुई एक इनायत है, जो दिल के तारों से जुडी है,एक इबादत है. चोट किसी को लगती है तो, दर्द किसी को होता है. दोस्त वो हमसाया है जो हमेशा हमारे साथ चलता है. दोस्तों आज हम ऐसी ही भूली बिसरी दोस्ती की बात कर रहे है....द लीजेंड बिग बी अमिताभ बच्चन की दोस्ती. 


आप सोच रहे होंगे कि अमिताभ बच्चन का दोस्त कौन, अमरसिंह या हमारे देश के PM मोदी, जिनके गुणगान करने में वो ...”अदभुत आश्चर्य” कहते हुए कभी थकते नहीं, नहीं जनाब हम बात कर रहे है भारतीय राजनीति के महानायक राजीव गाँधी की ! कभी अमित के लंगोटिया यार रहे राजीव सातवें आसमान पर बैठकर ये गाना तो नहीं गुनगुना रहे है...”मेरे दोस्त किस्सा ये क्या हो गया, सुना है कि तू बेवफा हो गया”. 


हमारे बिग बी राजीव गाँधी के लंगोटिया यार रह चुके है.... कहा तो यह भी जाता है कि उनके पिताजी महान कवि श्री हरिवंश राय बच्चन जी के लिए शासकीय पद का सृजन भी इंदिरा और तेजी बच्चन की बेस्ट फ्रेंडशिप का ही परिणाम था, इस प्रकार देखा जाय तो गाँधी-बच्चन की फ्रेंडशिप बहुत पुरानी है....तिस मारखां लोग यह भी कहते है कि राजीव की डेशिंग और ग्रैंड पर्सनालिटी देखकर स्वर्गीय महमूद ने उनको “बॉम्बे टू गोवा” फिल्म ऑफर की थी, जिसे नेहरु-गाँधी परिवार के इस वारिस ने नम्रतापूर्वक इनकार कर दिया और अपनी जगह अमित को फिल्म साईन करने को कहा,जिससे सदी के महानायक का जन्म हुआ, शहंशाह जब कुली फिल्म में घायल हुए तो इंदिरा जी प्रधानमंत्री पद की महिमा को छोड़कर उनको मिलने हॉस्पिटल गई, पर एक बात ऐसी है जो इस दिल को धक्का पहुंचाती है, सूत्रों की माने तो इमरजेंसी के बाद जब मोरारजी शासन आया तो राजीव किसी काम से बॉम्बे आये...उन्होंने अमित से उनकी कार एयरपोर्ट पर रिसीव करने को कहा, लेकिन शासन के डर से उन्होंने अपनी कार नहीं पहुंचाई, इसमें कितना सच और कितना झूठ है ये तो उपरवाला ही जाने, लेकिन यह भी सत्य है कि 1984 में जब आयरन लेडी इंदिराजी की डेथ हुई तो उस समय राजीव के साथ अमित कंधे से कन्धा मिलाकर खड़े थे. उस समय माननीय अटलजी के सामने खुद राजीव अमित को लाए. 


सियाने लोग तो यह भी कहते है कि इस चुनावी दंगल में अटलजी जमानत भी बमुश्किल बची. इस दोस्ती में भूचाल तब आया जब हमारे एंग्री यंग मैन के ऊपर “”बोफ़ोर्स कमीशन” का दाग आया, उस समय गाँधी परिवार ने उनको कोई सपोर्ट नहीं किया,फिर हमारे बिग बी विदेशी कोर्ट से खुद की बेगुनाही का सबुत ले आये. कुछ राजनीतिज्ञ दबी जुबाँ से यह भी कहते है कि अमित ने राजीव के रिश्तों का फ़ायदा उठाकर किसी बड़े रसूखदार व्यापारी घराने को उस समय फ़ायदा दिलवाया, जिसका बड़ा कमीशन हमारे बिग बी को मिला, किन्तु वे इस बात को हमेशा ही झुठलाते रहे. अब इस फ्रेंडशिप में कौन सही कौन गलत....पर जीवन की इस ढलती सांझ में हमारे एंग्री मैन को कभी अपने चाइल्डहुड फ्रेंड की याद आएगी और क्या कभी वो सारी बाते बिसारकर अपने दिल के भीतर तहों में छिपे अपनी गहरी मित्रता को दुबारा खंगालकर, तमाम गिले-शिकवे बुलाकर अपने उस मित्र को भी ट्विटर पर एक चिट्ठी लिखेंगे? #अद्भूताश्चर्य  

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